पूर्व स्टारबक्स सीईओ लक्ष्मण नरसिम्हन की वायरल सोशल मीडिया पोस्ट ने काम-जीवन संतुलन पर बल दिया। उन्होंने 6 बजे के बाद काम न करने के महत्व को रेखांकित किया जिससे उत्पादकता और भलाई में सुधार होता है। इस पहल का व्यापक समर्थन मिला है। नए सीईओ ब्रायन निकोल ने भी जवाब में कर्मचारियों के स्वास्थ्य और समय प्रबंधन के महत्व की पुष्टि की। इस चर्चा ने कार्यस्थल संस्कृति पर व्यापक बातचीत आरम्भ की है।
काम-जीवन संतुलन कैसे बनायें: आसान कदम और रोज़ की привычाएं
अक्सर हम काम में इतना उलझ जाते हैं कि घर का समय, परिवार या अपनी पसंद के शौक पूरी तरह छूट जाते हैं। लेकिन अगर आप थोड़ा‑सा प्लान बना लें तो दोनों को साथ रखना मुश्किल नहीं है। सबसे पहले यह समझें कि संतुलन मतलब ‘आधा‑आधा’ नहीं, बल्कि प्राथमिकता अनुसार ऊर्जा बाँटना है।
समय प्रबंधन के बुनियादी कदम
पहला काम – एक साधा टू‑डू लिस्ट बनायें। हर दिन 3‑4 मुख्य टास्क चुनें और बाकी को अगले दिन या सप्ताह में शिफ्ट करें। इससे ओवरलोड नहीं होता और मन साफ रहता है। दूसरा, टाइम ब्लॉक्स का प्रयोग करें: सुबह के दो घंटे सबसे महत्वपूर्ण काम के लिए रखिए, दोपहर में मीटिंग्स, शाम को परिवार/शौक। मोबाइल अलर्ट या एप्लीकेशन से रिमाइंडर सेट कर लें, ताकि ब्रेक नहीं भूलें। अंत में, ‘ना’ कहना सीखें। अगर कोई प्रोजेक्ट आपके मुख्य लक्ष्य से बाहर है तो उसे politely टाल दें – आपका समय अमूल्य है।
तनाव से निपटने की सरल तकनीक
काम के दबाव को कम करने के लिए रोज़ 5‑10 मिनट ध्यान या गहरी साँसें लेना फायदेमंद रहता है। एक छोटा वॉक, संगीत सुनना या चाय का कप भी माइंड फ्रेश करता है। शाम को स्क्रीन टाइम घटाएँ; मोबाइल और लैपटॉप बंद करके परिवार के साथ बात करें या किताब पढ़ें। अगर काम में लगातार तनाव महसूस हो रहा है तो अपने बॉस से खुलकर बात करें – अक्सर प्रोजेक्ट डेडलाइन या सपोर्ट की जरूरत को समझा कर हल निकाला जा सकता है।
स्वास्थ्य भी संतुलन का हिस्सा है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद (कम से कम 6‑7 घंटे) और हेल्दी खाने से ऊर्जा लेवल बढ़ता है और काम में फोकस बेहतर रहता है। अगर आप रात भर जागते हैं तो अगले दिन की प्रोडक्टिविटी गिरती है, इसलिए सोने का समय तय कर रखें।
अंत में यह याद रखिए कि संतुलन एक बार बनाकर छोड़ दिया नहीं जाता; इसे रोज़ थोड़ा‑थोड़ा एडजस्ट करना पड़ता है। छोटे‑छोटे बदलावों से बड़ी खुशी मिलती है – चाहे वो 10 मिनट का योगा हो या सप्ताहांत पर परिवार के साथ पिकनिक। आज से ही एक छोटा कदम उठाएँ, और देखिए कैसे आपका काम‑जीवन संतुलन धीरे‑धीरे बेहतर होता जाता है.