भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर है। 96 वर्ष के आडवाणी को नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर विनीत सूरी की देखरेख में उनकी उपचार चल रही है। इससे पहले उन्हें एम्स से छुट्टी दी गई थी।
लाल कृष्ण आडवाणी: राजनीति की कहानी और आज का असर
अगर आप भारतीय राजनीति को थोड़ा‑बहुत देखते हैं तो ‘लाल कृष्ण आडवाणी’ नाम आपके दिमाग में जरूर आया होगा। 1954 में जन्में यह नेता, युवा उम्र से ही सामाजिक मुद्दों में रूचि रखते थे और धीरे‑धीरे पार्टी की बुनियाद पर काम करने लगे। आज वो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन उनका सफर सिर्फ एक पद तक सीमित नहीं रहा।
राजनीतिक सफर: शुरुआती कदम से अब तक
आडवाणी ने अपने करियर की शुरुआत छात्र आंदोलन से की। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कई प्रदर्शनों का आयोजन किया और राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाई। 1990‑के दशक में भाजपा में शामिल होने के बाद, वे पार्टी के युवा मोर्चे के प्रमुख बन गए। उस समय उनके द्वारा किए गये कई अभियान आज भी याद किए जाते हैं – जैसे ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और शैक्षिक सुधार।
2004 में उन्होंने पहली बार संसद सदस्यता हासिल की और तब से लगातार दो‑तीन बार चुने गये। हर बार उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को सीधे मदद पहुंचाने पर ध्यान दिया—सड़कों का निर्माण, पानी की व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार। उनका मानना है कि राजनेता को जमीन से जुड़ा रहना चाहिए, नहीं तो आवाज़ तक पहुँच ही नहीं पाती.
नवीनतम खबरें और विचार
2025 में लाल कृष्ण आडवाणी ने कई महत्वपूर्ण बयानों के साथ मीडिया में चर्चा का विषय बने। उन्होंने हालिया बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे व्यापारियों को सस्ते ऋण की जरूरत है, न कि बड़े उद्योगों को टैक्स रिबेट। इसी दौरान वह भारत‑अमेरिका आर्थिक साझेदारी के बारे में भी अपना नजरिया रख रहे हैं – “सहयोग जरूरी है, लेकिन हमारे किसानों की रक्षा पहले होनी चाहिए” उन्होंने कहा.
आडवाणी का सोशल मीडिया पर भी प्रभाव बढ़ रहा है। उनके ट्विटर और फ़ेसबुक अकाउंट्स पर रोज़ाना लाखों लोग उनके विचार पढ़ते हैं। हाल ही में उन्होंने ‘डिजिटल इंडिया’ योजना के विस्तार को लेकर एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने ग्रामीण इंटरनेट कवरेज को प्राथमिकता देने की बात कही। इस पहल से छोटे शहरों में डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी, उनका मानना है.
भविष्य की ओर देखते हुए आडवाणी ने कहा कि भारत को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर निवेश करना होगा। उन्होंने बताया कि अगर राज्य सरकारें और केंद्र मिलकर योजना लागू करेंगे तो रोजगार में इज़ाफ़ा होगा और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहेगा.
समाप्ति की बात करें तो लाल कृष्ण आडवाणी का राजनैतिक दृष्टिकोण हमेशा व्यावहारिक रहा है। वे बड़े वादे नहीं, बल्कि ठोस कदमों को महत्व देते हैं। चाहे वह ग्रामीण विकास हो या डिजिटल परिवर्तन, उनका फोकस हमेशा लोगों की ज़रूरत पर रहता है। अगर आप उनके काम और विचारों से जुड़ना चाहते हैं तो दैनिक समाचार भारत की वेबसाइट पर उनकी ताज़ा खबरें देख सकते हैं।