इस वर्ष 23 मई को बुद्ध पूर्णिमा पर कुछ खास राशियों के लिए सौभाग्य और समृद्धि लेकर आने वाली है। गजलक्ष्मी योग और अन्य शुभ योगों के निर्माण से इन राशियों को आर्थिक लाभ और सफलता मिलने की संभावना है।
बुद्ध पूर्णिमा 2024: तिथि, महत्ता और कैसे मनाएँ
क्या आप जानते हैं कि 2024 में बुद्ध पौराणिक पूर्णिमा कब आएगी? यह दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बहुत खास है क्योंकि इसी दिन सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान प्राप्त किया था। इस लेख में हम तिथि, महत्व और घर‑बाहर दोनों तरह के पूजा‑पाठ की जानकारी देंगे, ताकि आप बिना झंझट के उत्सव को पूरी मस्ती से मनाएँ।
तारीख और शेड्यूल
2024 में बुद्ध पौराणिक पूर्णिमा 15 मई (बुधवार) को पड़ती है। चंद्र कैलेंडर के अनुसार यह माह के अष्टमी तिथि पर आता है, इसलिए कई जगहों पर इस दिन को ‘वेसाक’ भी कहा जाता है। अधिकांश शालाओं में सुबह 6‑7 बजे धूप स्नान और लोटस फूल से मंडप सजाकर ध्यान सत्र आयोजित किया जाता है। अगर आप यात्रा की योजना बना रहे हैं तो यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि कई प्रमुख बौद्ध स्थल इस दिन विशेष समारोह रखते हैं।
भूगोलिक महत्त्व – कहाँ‑कहाँ मनाएँ?
भारत में बोध गया (बिहार), सारनाथ (उttar प्रदेश) और काशी (वाराणसी) सबसे बड़े केंद्र हैं। बोध गया में महाविरज मंदिर के पास बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है, जहाँ धूप‑अर्घ्य और प्रार्थना सभा लगती है। सारनाथ में पुरातन स्तूपों का प्रकाश समारोह देखते ही बनता है—सूरज की पहली किरणें जब पानी पर पड़ती हैं तो एक अनोखा दृश्य दिखता है। यदि आप दक्षिण भारत में हैं, तो लद्दाख के तिब्बती बौद्ध मोनेस्ट्री और हिमाचल प्रदेश के टाक्सी भी आकर्षक विकल्प हैं। इन जगहों पर स्थानीय संगीत, पवित्र भोजन (भिक्खु थाली) और शांति‑ध्यान का विशेष माहौल मिलता है।
घर में पूजा करने वाले लोग एक छोटी सी अल्पना बनाकर धूप, मोती और सत्रियों से सजाते हैं। बौद्ध प्रतिमा के सामने सफेद कपड़े (बोथा) रखकर वचन‑विचार करते हैं। बच्चों को कहानी सुनाने का भी अच्छा मौका मिलता है—गौतम बुद्ध की जीवन यात्रा, चार आर्य सिद्धांत और मध्यम मार्ग की बात बताइए। इससे न सिर्फ ज्ञान बढ़ता है बल्कि पारिवारिक बंधन भी मजबूत होते हैं।
यदि आप इस दिन दान‑परोपकार करना चाहते हैं, तो स्थानीय आश्रम या वृद्धाश्रम में भोजन वितरित कर सकते हैं। कई मोनेस्ट्रीज में अन्नदान के साथ ‘धर्मपत्र’ (संकल्प पत्र) लिखवाने की सुविधा भी रहती है, जिससे आपका इरादा और स्पष्ट हो जाता है।
बुद्ध पौराणिक पूर्णिमा पर कुछ खास रिवाज हैं: पहले धूप स्नान, फिर अल्पना में शंख‑नाद या घंटी बजाकर वातावरण को शांत बनाते हैं। इसके बाद ‘त्रिपिटक’ पढ़ते हुए तीन बार घुमाव (चक्र) लेते हैं—यह मन को एकाग्र करता है। अंत में सभी मिलकर ‘संध्या बोधि’ गाते हैं, जिससे पूरे माहौल में शांति की भावना छा जाती है।
अंत में एक छोटा टिप: यदि आप सुबह जल्दी उठने के लिये संघर्ष कर रहे हैं तो अपने मोबाइल पर अलार्म सेट करें और रात को हल्की रोशनी रखें—ऐसे छोटे‑छोटे कदम से आपका मन शांत रहेगा और पूर्णिमा की रौशनी का सही मज़ा मिलेगा।
तो इस बुद्ध पौराणिक पूर्णिमा 2024 को चाहे आप घर पर ही मनाएँ या किसी पवित्र स्थल की यात्रा, अपने दिल में शांति और करुणा के साथ इसे जिएँ। खुश रहें, स्वस्थ रहें!