पेरिस ओलंपिक 2024 का समापन समारोह 11 अगस्त को स्टेड डे फ्रांस में होगा। इसमें भारतीय ध्वजवाहक के रूप में मनु भाकर और पीआर श्रीजेश चुने गए हैं। यह समारोह संगीत, नृत्य और अन्य अद्वितीय प्रदर्शनों से भरा होगा और इसे Sports18 और JioCinema पर देखा जा सकेगा।
भारतीय ध्वजवाहक – क्या है उनका रोल?
जब भी आप राष्ट्रीय समारोह देखते हैं, तो झंडा ऊँचा लहराता देखे बिना नहीं रह पाते। वह झंडे को संभालने वाला व्यक्ति ध्वजवाहक कहलाता है। भारत में ध्वजवाहकों का काम सिर्फ़ झंडा ले जाना नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना को लोगों तक पहुंचाना भी है।
ध्वजवाहक बनना आसान नहीं होता; इसमें शारीरिक फिटनेस, आत्मविश्वास और नियमों का पालन जरूरी है। सरकार ने कई बार ध्वजवाहकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं ताकि हर बड़े इवेंट में सही ढंग से झंडा लहराया जा सके।
ध्वजवाहक की ज़िम्मेदारियाँ क्या‑क्या?
पहली बात, ध्वज को संभालते समय हमेशा दो हाथों से पकड़ना चाहिए, ताकि कोई भी गंदगी या क्षति न हो। दूसरा, जब झंडे का सम्मान किया जाए तो उसे नीचे नहीं गिरने देना चाहिए; अगर हवा तेज़ हो तो सही दिशा में ले जाना पड़ता है। तीसरी बात, हर बड़े राष्ट्रीय इवेंट जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और खेल प्रतियोगिताओं में ध्वजवाहक को समय पर तैयार होना चाहिए।
ध्वजवाहकों का एक अनोखा पहलू यह भी है कि वे अक्सर स्कूल‑कॉलेज के युवा होते हैं, जिनके पास उत्साह और ऊर्जा भरपूर होती है। कई बार उन्हें अपने शैक्षणिक या पेशेवर जीवन में भी इस अनुभव से फायदा मिलता है—क्योंकि सार्वजनिक बोलना और टीमवर्क सिखता है।
भविष्य में ध्वजवाहकों के लिए क्या अवसर हैं?
आजकल कई निजी संस्थान और खेल संघ भी अपने इवेंट्स में प्रोफेशनल ध्वजवाहकों को रख रहे हैं। अगर आप फिट हैं, तो इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं—खासकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जहाँ देश का प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है।
सरकारी स्तर पर भी रोजगार के विकल्प मिलते हैं। रक्षा मंत्रालय, रेलवे और विभिन्न सरकारी विभाग अपने समारोहों में ध्वजवाहकों को नियुक्त करते हैं। इन पदों पर अक्सर स्थायी या अनुबंधित आधार पर काम मिलता है।
अगर आप ध्वजवाहक बनना चाहते हैं, तो सबसे पहले स्थानीय निकाय या जिला प्रशासन से संपर्क करें। वे आमतौर पर वार्षिक परीक्षा और शारीरिक परीक्षण कराते हैं। तैयारी में नियमित व्यायाम, सही पोशाक (सफेद शर्ट‑पैंट) और झंडे के इतिहास की जानकारी रखना मददगार रहता है।
संक्षेप में, ध्वजवाहक केवल एक पद नहीं बल्कि देशभक्ति का प्रतीक है। उनका काम हर राष्ट्रीय समारोह को यादगार बनाता है और युवा पीढ़ी को जिम्मेदारी सिखाता है। तो अगली बार जब आप किसी परेड देखेंगे, तो झंडे के पीछे उस व्यक्ति की मेहनत को भी सराहना न भूलें।