अमेरिकी फेडरल रिजर्व 18 सितंबर, 2024 को अपना दो दिवसीय बैठक के समापन पर चार सालों में पहली बार ब्याज दर कटौती की घोषणा करने के लिए तैयार है। फेड चेयर जेरोम पॉवेल दर कटौती की सीमा का खुलासा करेंगे। नीतिगत निर्धारक महंगाई को 2% पर लाने की ओर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व: क्या नया फैसला है?
फेडरल रिज़र्व (Fed) हर महीने मार्केट के लिए एक बड़ी खबर लाता है। अगर आप स्टॉक्स या बॉन्ड में पैसा लगाते हैं, तो Fed की नीति सीधे‑सीधे आपके पोर्टफ़ोलियो को छूती है। इस बार भी कई संकेत मिले कि ब्याज दरें फिर से बदल सकती हैं। निवेशकों ने पहले ही अपना पोर्टफ़ोलियो रीशिफ़्ट करना शुरू कर दिया—टेक‑हैवी नैस्डैक की रफ्तार धीमी, जबकि डाउ में औद्योगिक शेयरों का वजन बढ़ा है।
फेडरल रिज़र्व की मौजूदा नीतियां
Fed ने पिछले कुछ महीनों में अपने बेस रेट को 5% के आसपास रखा था, पर अब इन्फ्लेशन डेटा (CPI‑PCE) और नौकरी बाजार के संकेत देख कर थोड़ा बदलाव किया जा सकता है। अगर महंगाई फिर से बढ़ती दिखे तो दरें ऊपर जा सकती हैं; नहीं तो वे स्थिर रहेंगे या हल्की गिरावट भी हो सकती है। यह निर्णय बॉन्ड यील्ड को सीधा असर देता है—जैसे ही ब्याज दरें बढ़ेंगी, बॉन्ड की कीमतें घटेंगी और यील्ड तेज़ी से बढ़ेगी।
इसी बीच, डॉलर की ताकत भी देखी जा रही है। डॉलर मजबूत होने पर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश थोड़ा धीमा पड़ता है, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स दोनों को असर पड़ सकता है। इसलिए फेड के हर शब्द को मार्केट टेम्परेचर समझा जाता है।
बाजार में हाल के रुझान
डाउ ने अभी‑ही एक नई ऊँचाई छू ली, जबकि नैस्डैक की गति धीमी हुई। इसका कारण निवेशकों का टेक्ट‑सेक्टर से बाहर निकल कर औद्योगिक, वित्तीय और डिविडेंड देने वाले शेयरों की ओर शिफ्ट होना है। बॉन्ड यील्ड भी ऊपर जा रहे हैं—10 साल के यू.एस. ट्रेज़री पर रिटर्न अब 4% से अधिक हो गया है। यह सब एक बड़े ‘रोटेशन’ का संकेत देता है, जहाँ पैसे कम जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं।
अगले हफ्ते CPI‑PCE डेटा आएगा, और अगर वह उम्मीद से ज़्यादा आया तो फेड के पास रेट हाइक करने का झोंका होगा। साथ ही AI‑संबंधित कंपनियों की क्वार्टरली कमाई भी मार्केट मूड को तय करेगी—अगर परिणाम अच्छा रहा तो टेक शेयर फिर से चढ़ सकते हैं, वरना मौजूदा रोटेशन जारी रहेगा।
इन्हीं कारणों से भारतीय निवेशकों के लिए फेडरल रिज़र्व का हर अपडेट महत्वपूर्ण है। अगर आप अपने पोर्टफ़ोलियो में अमेरिकी स्टॉक्स या डॉलर‑डेनोमिनेटेड एसेट्स रखते हैं, तो इस समय रिव्यू करना बेहतर रहेगा—ब्याज दर, बॉन्ड यील्ड और डॉलर्स की ताकत को देख कर अपनी एंट्री या एक्ज़िट पॉइंट तय करें।
सारांश में कहें तो फेड के फैसले अभी भी अनिश्चितता भरे हैं, पर संकेत स्पष्ट हैं: ब्याज दरें, इन्फ्लेशन और डॉलर्स की दिशा ही आगे का रास्ता तय करेगी। इसलिए हर हफ्ते फेड की प्रेस कॉफ़ी सुनते रहें, ताकि आप अपने निवेश को सही दिशा में ले जा सकें।