IPL 2025 में SRH-जीटी मैच के दौरान वाशिंगटन सुंदर के विवादित आउट पर फैंस में गहरी नाराजगी देखने को मिली। तीसरे अंपायर ने रिप्ले के बावजूद उन्हें आउट करार दिया, जिससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। जीटी ने यह मुकाबला सात विकेट से जीत लिया।
तीसरा अंपायर विवाद: कब, क्यों और कैसे होता है?
क्रिकेट देख रहे हो तो अक्सर टीवी पर "तीसरा उम्पायर" का नाम सुनते हो. ये वही अधिकारी है जो फील्ड के निर्णय को टेक्नोलॉजी से चेक करता है. लेकिन जब उनका फैसला मैच की दिशा बदल देता है, तब बात बन जाती है – यहीं से "तीसरा अंपायर विवाद" शुरू होता है.
तीसरा उम्पायर की भूमिका
तीसरा उम्पायर मुख्य रूप से दो चीज़ देखता है: पहला ड्रेसिंग टेलीविजन सिस्टम (डिटीएस) के ज़रिये बॉल ट्रैकिंग, और दूसरा रिव्यू कंसर्ट में फील्ड उम्पायर के कॉल को चेक करता है. जब खिलाड़ी या टीम कैप्टन को लगता है कि आउट या नॉट‑आउट का फैसला गलत है, तो वे तुरंत टेलीक्रॉनिक रेफ़री (टीआर) को अपील कर सकते हैं. तब तीसरा उम्पायर स्क्रीन पर सारे एंगल देखता है और फिर अपना निर्णय देता है.
हालिया विवाद और उनका असर
पिछले साल कुछ बड़े मैचों में तिसरे उम्पायर के फैसले ने सबको चकित कर दिया. उदाहरण के तौर पर, एक तेज़ी से बदलते ओवर में बॉल को "नो‑बॉल" घोषित करना या फिर लेग‑बाय का फैसला उलटना. ऐसे निर्णय न सिर्फ खेल की दिशा बदल देते हैं बल्कि टीमों की रणनीति और दर्शकों की भावनाओं पर भी असर डालते हैं.
विवाद के बाद अक्सर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो जाती है. फैंस अपने पसंदीदा खिलाड़ी या टीम को बचाने की कोशिश में तर्क पेश करते हैं, जबकि विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं को समझाते हुए बताते हैं कि नियम कैसे लागू होते हैं. अगर आप इन अपडेट्स से जुड़ना चाहते हैं तो भरोसेमंद क्रिकेट साइटों और आधिकारिक टीवी चैनलों पर ध्यान दें.
भविष्य में भी तिसरे उम्पायर के फैसले बदल सकते हैं, इसलिए खेल को समझने का सबसे आसान तरीका है कि आप हर रिव्यू पर नज़र रखें, डिटीएस की क्लैरिटी देखें और तय करें कि क्या आपका अनुमान सही था. इससे आपको मैच की गहराई से आनंद मिलेगा और विवादों का भी सही अर्थ समझ आएगा.
तो अगली बार जब "तीसरा उम्पायर" शब्द सुनें, तो याद रखें – यह सिर्फ तकनीकी मदद नहीं, बल्कि खेल के बड़े निर्णयों का हिस्सा है. इसके पीछे की प्रक्रिया को जानना आपके क्रिकेट अनुभव को और मज़ेदार बना देगा.