बाबू जगजीवन राम की 117वीं जयंती पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हैदराबाद और मैसूर में उनके योगदान पर चर्चा हुई और भारत रत्न की मांग उठी। उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों और दलित समुदाय के लिए उनके संघर्ष को सराहा गया।