कोलकाता की एक विशेष अदालत ने सीबीआई को आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष और चार अन्य डॉक्टर्स पर पॉलीग्राफ परीक्षण करने की अनुमति दी है। यह फैसला 31 वर्षीय स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के कथित बलात्कार और हत्या की जांच के तहत लिया गया है। पीड़िता का शव अस्पताल के चेस्ट विभाग के सेमिनार हॉल में पाया गया था।
पॉलिग्राफ परीक्षण क्या है? आसान समझ के साथ
पॉलिग्राफ, या पॉलीग्राफी, एक ऐसी मशीन है जो व्यक्ति की शरीर में हो रहे बदलाव को मापती है—जैसे दिल की धड़कन, साँस लेना और पसीने का स्तर। जब कोई सवाल पूछा जाता है तो ये संकेत मिलते‑जुलते हैं, जिससे जांचकर्ता पता लगा सकता है कि जवाब सच है या नहीं।
पॉलिग्राफ कैसे काम करता है?
पहले चरण में व्यक्ति के हाथों पर इलेकट्रोड लगाते हैं और उसकी सांस का प्रवाह भी मापा जाता है। फिर जांचकर्ता सवाल पूछता है—जैसे "क्या आपने यह चोरी की?" या "क्या आप सच बता रहे हैं?" हर जवाब पर मशीन इन संकेतों को रिकॉर्ड करती है। अगर दिल की धड़कन या पसीने में अचानक बदलाव आता है तो अक्सर इसे झूठ मान लिया जाता है। लेकिन याद रखें, कोई भी टेस्ट 100% सही नहीं होता; तनाव, डर या स्वास्थ्य समस्या भी परिणाम बदल सकती है।
पॉलिग्राफ कब उपयोग किया जाता है?
भारत में पॉलिग्राफ मुख्यतः दो जगहों पर मिलता है—पहला, पुलिस और न्यायालय की जांच में, जहाँ सबूत जुटाने के लिए इसे सहायक माना जाता है। दूसरा, निजी कंपनियों में सुरक्षा क्लियरेंस या एचआर प्रक्रिया में, जैसे बैंक या रक्षा उद्योग में काम करने से पहले। कुछ केस में यह रोजगार के दौरान भी इस्तेमाल होता है, पर कानूनी तौर पर इसकी वैधता अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।
उदाहरण ले तो 2023 की एक हाई‑प्रोफाइल केस में, जहाँ एक बड़े बैंक ने अपने वरिष्ठ प्रबंधक पर संदेह किया था—पॉलिग्राफ ने अंततः झूठे जवाब का संकेत दिया और आगे की जाँच से सबूत सामने आए। ऐसे मामलों में यह टूल जल्दी निर्णय लेने में मदद करता है, लेकिन हमेशा कोर्ट में अंतिम साक्ष्य नहीं माना जाता।
अगर आप खुद पॉलिग्राफ टेस्ट कराना चाहते हैं, तो भरोसेमंद संस्थान चुनें—जैसे सरकारी मान्यता वाले लैब या अनुभवी प्रोफ़ेशनल्स की टीम। प्रक्रिया आमतौर पर दो‑तीन घंटे की होती है: तैयारी, प्रश्नावली और विश्लेषण। फीस जगह के हिसाब से बदल सकती है, लेकिन अधिकांश निजी सेंटर 5,000‑10,000 रुपये में सेवा देते हैं।
ध्यान रखें—पॉलिग्राफ सिर्फ एक सहायक उपकरण है। अगर आप तनाव में हों या कोई दवाइयाँ ले रहे हों तो परिणाम भरोसेमंद नहीं रहेगा। इसलिए टेस्ट से पहले सभी मेडिकल जानकारी देना ज़रूरी है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने अधिकारों को जानें; किसी भी समय आप परीक्षण रोक सकते हैं यदि आपको लगता है कि आपके साथ अनुचित बर्ताव हो रहा है।
सारांश में, पॉलिग्राफ परीक्षण एक वैज्ञानिक तरीका है जो सच्चाई या झूठ का अंदाज़ा लगाने में मदद करता है, लेकिन इसे अकेला सबूत नहीं माना जा सकता। सही जानकारी और भरोसेमंद संस्थान के साथ ही आप इस प्रक्रिया को सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं।