राहुल गांधी ने बीजेपी की नेता स्मृति ईरानी को ऑनलाइन नफरत का शिकार होने पर बचाव किया और लोगों से भद्दी भाषा का प्रयोग न करने की अपील की। गांधी ने कहा कि जीतना और हारना ज़िन्दगी का हिस्सा है और दूसरों का अपमान करना कमजोरी की निशानी है। ये बयान तब आया जब ईरानी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में हारने के बाद दिल्ली में अपना आधिकारिक निवास खाली कर दिया।
ऑनलाइन नफरत: क्या है, क्यों बढ़ रही है और कैसे बचें?
क्या आपने कभी सोचा है कि इंटरनेट पर बुरे शब्द या अपमानजनक पोस्ट हमें कितना परेशान कर देते हैं? यही ऑनलाइन नफरत है। यह सिर्फ व्यक्तिगत गुस्सा नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सामाजिक तनाव पैदा करता है।
ऑनलाइन नफरत के मुख्य रूप
सबसे आम तौर पर नफ़रत के दो रूप दिखते हैं: एक तो ट्रोलिंग, जहाँ लोग जानबूझकर दूसरों को चिढ़ाते हैं; दूसरा हेटस्पीच, जिसमें धर्म, जाति या लिंग के आधार पर घृणात्मक भाषा प्रयोग होती है। इन दोनों ही चीजों से प्लेटफ़ॉर्म की शांति बिगड़ती है और अक्सर वास्तविक जीवन में भी टेंशन बढ़ता है।
रोकथाम के आसान कदम
पहला कदम है प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत करना। अपने अकाउंट का पासवर्ड नियमित रूप से बदलें, दो‑फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें और अनजान लोगों की फ़्रेंड रिक्वेस्ट को हटा दें। दूसरा, जब भी किसी पोस्ट में नफ़रत भरा कंटेंट देखें, तुरंत ‘रिपोर्ट’ बटन दबाएँ; अधिकांश प्लेटफ़ॉर्म इस पर कार्रवाई करते हैं।
तीसरा, अपने नेटवर्क में सकारात्मक सामग्री साझा करें। अगर आप अच्छे विचारों और उपयोगी जानकारी को फॉरवर्ड करेंगे तो नफ़रत वाले पोस्ट का प्रभाव कम होगा। साथ ही, जब कोई आपके सामने अपमानजनक टिप्पणी करे तो शांति से जवाब दें या सीधे डिस्कशन छोड़ दें – लड़ाई नहीं, समझदारी चाहिए।
चौथा, यदि आप लगातार टार्गेट हो रहे हैं तो साइबरक्राइम विभाग में FIR दर्ज करवा सकते हैं। भारतीय कानून में ‘हिंसा के प्रवर्तक’ को दंडित किया जाता है और कई केस कोर्ट तक पहुँचते हैं। याद रखें, कानूनी कार्रवाई केवल तभी काम करती है जब आपके पास प्रमाण होते हैं – स्क्रीनशॉट या चैट लॉग सुरक्षित रखिए।
पांचवां, बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखें। माता‑पिता को चाहिए कि वे समय‑समय पर उनके सोशल अकाउंट देखेँ, उचित सीमाएं तय करें और डिजिटल साक्षरता की ट्रेनिंग दें। इससे नफ़रत वाले समूह में शामिल होना कम होता है।
अंत में, अगर आप किसी पोस्ट से गुस्सा या दुखी महसूस कर रहे हैं तो तुरंत स्क्रीन बंद करके बाहर निकलें, कुछ देर टहलें या संगीत सुनें। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी ऑनलाइन नफ़रत के प्रभाव को घटाता है।
ऑनलाइन नफरत एक बड़ा सामाजिक मुद्दा है, पर सही कदमों से हम इसे कम कर सकते हैं। अपने अनुभव और टिप्स दूसरों के साथ शेयर करें, ताकि मिलकर एक स्वस्थ डिजिटल माहौल बन सके।