इंफोसिस के शेयर में 1% की गिरावट आई जब कंपनी को 32,000 करोड़ रुपये का जीएसटी नोटिस मिला। DGGI का आरोप है कि जुलाई 2017 से 2021-22 तक विदेशी शाखाओं से प्राप्त सप्लाइज़ पर IGST लागू होता है। इंफोसिस ने नोटिस को खारिज कर दिया, कंपनी का कहना है कि उसने सभी भुगतान किए हैं और यह पूर्णतः केंद्रीय और राज्यीय नियमों का पालन कर रही है।
जिएसटी विवाद – क्या चल रहा है?
आपने शायद टीवी या सोशल मीडिया पर जिएसटी का नाम कई बार सुना होगा। लेकिन अक्सर लोग पूछते हैं, ‘ये विवाद किस बारे में है?’ आसान शब्दों में कहें तो जिएस्टी (जस्टिस सिस्टम टेस्ट) एक एसेसमेंट है जो खिलाड़ी‑आधारित लीग या बड़े टूर्नामेंट में नियम‑उल्लंघन को जांचता है। जब कोई निर्णय ‘गलत’ माना जाता है, तब ही विवाद पैदा होता है।
हालिया IPL 2025 मैच में तिसरे अंपायर ने एक प्लेयर को आउट कर दिया, जबकि रिव्यू दिखाने पर वह स्पष्ट था कि खिलाड़ी का हाथ बॉल के बाहर था। यही कारण बना ‘जिएसटी विवाद’ का मुख्य उदाहरण। फैंस तुरंत सोशल मीडिया पर बहस शुरू कर देते हैं, और हर कोई अपनी राय देता है – कुछ अंपायर की सच्चाई को समझते हैं, तो कुछ नियमों की कड़ी व्याख्या चाहते हैं।
विवाद के प्रमुख कारण
1. टेक्निकल गड़बड़ी – रेफ़री या एआर सिस्टम में कभी‑कभी तकनीकी त्रुटि होती है, जिससे आउट/नॉट‑आउट का फैसला गलत हो जाता है।
2. नीति में अस्पष्टता – नियमों की भाषा अक्सर जटिल रहती है, इसलिए विभिन्न टीमें अलग‑अलग तरीके से उसका उपयोग करती हैं।
3. फ़ैन्स का दबाव – बड़े मैचों में फैंस बहुत उत्साहित होते हैं और जल्दी ही किसी निर्णय को ‘भ्रष्ट’ कह देना आसान होता है।
विवाद के असर और समाधान
जब जिएसटी विवाद बढ़ता है, तो दो चीज़ें प्रभावित होती हैं: खेल का माहौल और दर्शकों की भरोसा। अगर हर फैसला पर सवाल उठे, तो मैच का रोमांच कम हो जाता है। इसलिए लीग प्रबंधन अक्सर त्वरित समीक्षा प्रणाली लागू करता है – जैसे ‘डॉ. रेफ़री’ या वीडियो रीप्ले के बाद तुरंत निर्णय बदलना। यह कदम फैंस को दिखाता है कि खेल में पारदर्शिता है।
इसके अलावा, खिलाड़ियों और अंपायर्स दोनों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि नियम‑ज्ञान अपडेट रहे। कुछ लीग्स ने ‘जिएसटी एथिक्स कमेटी’ बनाई है, जो हर विवाद के बाद रिपोर्ट तैयार करती है और सुधार की सिफ़ारिशें पेश करती है। ये कदम भविष्य में समान वादों को रोकने में मदद करते हैं।
आप भी यदि जिएसटी विवाद पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो टिप्पणी सेक्शन या सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर स्पष्ट तथ्यों के साथ लिखें। बिना आधार के आरोप सिर्फ विवाद बढ़ाते हैं और असली मुद्दे से ध्यान हटाते हैं। याद रखें, खेल का मकसद मनोरंजन है, न कि लगातार बहस।
संक्षेप में कहें तो जिएसटी विवाद केवल एक ‘स्कोरकार्ड’ नहीं, बल्कि खेल की ईमानदारी को परखने का जरिया भी है। जब तक लीग्स नियमों को स्पष्ट करेंगे और तकनीकी मदद बेहतर होगी, तब तक इन विवादों का असर धीरे‑धीरे कम होगा। अब आप जानते हैं कि जिएसटी विवाद क्यों होते हैं और उन्हें कैसे सुलझाया जा सकता है – तो अगली बार मैच देखते समय इसको ध्यान में रखें और खेल के आनंद को बर्बाद न करें।