जर्मनी के टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने कास्पर रूड को हराकर फ्रेंच ओपन के फाइनल में जगह बनाई है। चौथी वरीयता प्राप्त ज्वेरेव ने चार सेट के शानदार मुकाबले में जीत हासिल की। यह उनकी पहली बार रोलाण्ड गैरोस फाइनल में पहुंचने की उपलब्धि है। उनकी जीत उनके घरेलू हिंसा मामले के कोर्ट से बाहर समझौते के बाद आई है।
घरेलू हिंसा – समझें, बचें, समाधान पाएँ
घर में जब प्यार की जगह डर बन जाये तो वह घरेलू हिंसा कहलाती है। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं या ‘परिवार का मामला’ समझ कर सुलझाने नहीं कोशिश करते। लेकिन यही सबसे खतरनाक होता है, क्योंकि पीड़ित को मदद मिलने में देर हो सकती है। इस लेख में हम बताएँगे कि घरेलू हिंसा के कौन‑कौन से रूप होते हैं, किन बातों पर ध्यान देना चाहिए और तुरंत क्या कदम उठाएँ।
घरेलू हिंसा के मुख्य प्रकार
घरेलु हिंसा सिर्फ शारीरिक नहीं होती; यह भावनात्मक, आर्थिक और यौन भी हो सकती है। अगर आपका साथी आपको लगातार नीचा दिखाता है, आपके काम में दखल देता है या पैसे से कंट्रोल करता है तो वह भी घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है।
1. शारीरिक अत्याचार – मार‑पीट, धक्का देना, वस्तु फेंकना आदि।
2. भावनात्मक दुरुपयोग – अपमान, बुरी बातों से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना।
3. आर्थिक नियंत्रण – पैसे देने से मना करना या खर्च पर पूरी तरह हुक्म देना।
4. यौन शोषण – बिना सहमति के किसी भी प्रकार का यौन संबंध।
इनमें से एक या अधिक रूप मिलकर अक्सर पीड़ित को भ्रमित कर देते हैं, इसलिए पहचानना ज़रूरी है। अगर आपको इनमें से कोई संकेत दिखे तो आगे की कार्रवाई पर विचार करें।
सुरक्षित मदद कैसे प्राप्त करें?
पहला कदम खुद को सुरक्षित महसूस करवाना है। घर से बाहर निकलने का विकल्प तभी काम करता है जब आपके पास भरोसेमंद जगह हो – रिश्तेदार, दोस्त या महिला शेल्टर। अगर तुरंत बाहर नहीं जा सकते तो किसी विश्वसनीय मित्र को अपना हाल बताएँ और मदद माँगें।
कानूनी सहायता के लिए 181 (राष्ट्रीय महिलाओं हेल्पलाइन) पर कॉल करें। यह नंबर 24x7 उपलब्ध है और आपको नजदीकी पुलिस स्टेशन, महिला आयोग या शेल्टर का पता दे देगा। साथ ही आप सामाजिक न्यायालय में केस दर्ज करा सकते हैं; वहाँ फॉर्म भरने की प्रक्रिया आसान होती है और अक्सर फ्री लीगल एड भी मिलती है।
अगर आपके पास मोबाइल नहीं है तो कोई पड़ोसी या दोस्त आपका फ़ोन ले लेगा। याद रखें, मदद माँगना कमजोरी नहीं बल्कि साहस का परिचय है।
कई NGOs और सरकारी योजनाएँ मानसिक काउंसलिंग भी देती हैं। आप अपने नजदीकी ‘विमेन वेल‑फ़ेयर सेंटर’ में जाकर मुफ्त परामर्श ले सकते हैं। अक्सर ये केंद्र आर्थिक मदद, शैक्षिक सहायता और नौकरी के अवसर भी उपलब्ध कराते हैं, जिससे पीड़ित आत्मनिर्भर बन सके।
अंत में यह समझना ज़रूरी है कि घरेलू हिंसा को रोकना सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का फ़र्ज़ भी है। अगर आप किसी को देख रहे हों जो इस तरह के दुरुपयोग झेल रहा हो, तो चुप न रहें। छोटे‑छोटे संकेतों पर ध्यान दें और तुरंत मदद पहुँचाने की कोशिश करें। आपकी एक छोटी सी पहल कई जिंदगियों को बचा सकती है।