आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष ने इस्तीफा दे दिया है। जूनियर डॉक्टर की कथित हत्या और दुष्कर्म के बाद लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शनों और न्याय की मांग के बीच, यह कदम उठाया गया। मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर पूरे देश में डॉक्टर हड़ताल पर हैं।
डॉक्टर हत्या: क्या बदल रहा है भारत का स्वास्थ्य सेक्टर?
पिछले कुछ सालों में डॉक्टर पर हमला या हत्या के मामले बढ़ते दिख रहे हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि डॉक्टर सिर्फ़ मरीजों को इलाज देते हैं, लेकिन असलियत में उनका काम कई बार सामाजिक तनाव से जुड़ा होता है। आज हम बात करेंगे कि ये केस क्यों होते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।
हालिया डॉक्टर हत्याएँ
जाने-माने शहरों में दो-तीन बड़े मामलों ने सबका ध्यान खींचा है। उदाहरण के तौर पर, एक छोटे शहर में डॉक्टर साहब को उनके क्लिनिक के बाहर गोली मारकर मारा गया था जब मरीज की फीस लेकर विवाद हुआ था। इसी तरह, एक सरकारी अस्पताल में सर्जन को रात के समय लाश निकाली गई, क्योंकि उनका इलाज न करवाने वाले परिवार ने उन्हें गुस्से में धावा बोला। इन केसों में अक्सर आर्थिक दांव, डॉक्टर‑पेशेंट के बीच भरोसे की कमी और स्थानीय राजनीति का हाथ दिखता है।
कई बार पुलिस जल्दी कार्रवाई नहीं करती, जिससे अपराधी फिर से चल सकते हैं। लेकिन कुछ मामलों में तेज़ FIR दर्ज कर, जांच को हाई-टेक उपकरणों से जोड़कर पकड़ा गया। इस तरह के सफल केस लोगों को आशा देते हैं कि न्याय मिल रहा है।
डॉक्टर की सुरक्षा के उपाय
अगर आप डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ हैं तो कुछ आसान कदम उठाकर अपनी सुरक्षा बढ़ा सकते हैं। सबसे पहला, क्लिनिक के बाहर CCTV लगवाएँ और एंट्री‑एग्जिट पर गेट रखवाला रखें। दूसरा, मरीजों से मिलने वाले भुगतान को डिजिटल बनायें; नकद लेन‑देनों में अक्सर विवाद होते हैं। तीसरा, हर शाम अपने घर या हॉस्पिटल के आसपास की सड़कों का सर्वे करें और यदि कोई अजीब आवाज़ सुनाई दे तो तुरंत पुलिस को कॉल करें।
साथ ही, अस्पतालों को सुरक्षा टीम मजबूत करनी चाहिए और आपातकालीन अलार्म सिस्टम लगवाना चाहिए। स्थानीय प्रशासन से मिलकर डॉक्टर‑सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाने की मांग भी असरदार हो सकती है। इस तरह छोटे-छोटे कदम बड़ी दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं।
अंत में, जनता का सहयोग बहुत जरूरी है। जब कोई डॉक्टर सही इलाज देता है तो उसकी सराहना करें, लेकिन अगर किसी मरीज को असन्तोष है तो कानूनी रास्ता अपनाएँ, नहीं कि हिंसा के सहारे। सामाजिक जागरूकता बढ़ाने से ही हम इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकते हैं।
डॉक्टर हत्या का मुद्दा सिर्फ़ एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में गहरी खामियों की निशानी है। अगर सब मिलकर समाधान निकालें तो डॉक्टर और मरीज दोनों सुरक्षित रहेंगे, और हमारा स्वास्थ्य सेक्टर भी मजबूत होगा।