2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को हो रहा है, जो आंशिक रूप से दिखेगा। यह खास तौर पर उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और रूस के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। भारत और इसके पड़ोसी देशों में इसे नहीं देखा जा सकेगा। यह खगोलीय घटना वैज्ञानिकों और सांस्कृतिक रूप से खास मानी जाती है।
आंशिक सूर्यग्रहण 2025: कब और कहाँ देखें
क्या आपने कभी सोचा है कि आकाश में सूरज का थोड़ा‑सा भाग ढँक जाता है तो क्या महसूस होता है? यह वही दृश्य है जिसे हम आंशिक सूर्यग्रहण कहते हैं। इस साल का सबसे बड़ा आंशिक सूर्यग्रहण 14 अक्टूबर को आएगा और भारत के कई हिस्सों में इसे साफ़ देखा जा सकेगा। अगर आप भी इस अद्भुत नजारे को देखना चाहते हैं तो नीचे बताए गए बिंदुओं पर ध्यान दें।
भारत में देखने योग्य मुख्य क्षेत्र
आंशिक सूर्यग्रहण का कवरेज भारत के उत्तर‑पूर्वी भागों में सबसे अधिक रहेगा। दिल्ली, वाराणसी, पटना और असम के गुवाहाटी जैसे शहरों में लगभग 60% तक धूप छाया में बदल जाएगी। दक्षिण की ओर देखे तो कोलकाता, रांची और बंगलुरू में भी ठीक‑ठाक दृश्य मिलेगा, लेकिन कवरेज थोड़ा कम रहेगा (30‑40%)। अगर आप दूर से नहीं बल्कि घर के बाहर खुली जगह पर हैं तो किसी ऊँची इमारत या खुले मैदान से सूर्य को देखें, इससे आपको बेहतर दृष्टिकोण मिलेगा।
सुरक्षित देखे कैसे?
धूप को सीधे आँखों में देखने की कोशिश न करें—भले ही सिर्फ हिस्सा ढका हो, फिर भी सूरज के तेज़ रेज़ बहुत हानिकारक होते हैं। सबसे आसान उपाय है सौर फ़िल्टर वाले चश्मे का इस्तेमाल करना। अगर आपके पास ऐसा नहीं है तो आप साधारण सनग्लास या अंधी काँच से सुरक्षित नहीं रहेंगे। एक और विकल्प है पिनहोल प्रोजेक्शन: एक छोटे पेपर पर छेद बनाएँ, सूर्य के सामने रखें और दीवार पर धुंधला इमेज देखें। इससे आँखों को कोई नुकसान नहीं होगा और आप पूरी सिमुलेशन देख पाएँगे।
फोटोग्राफी में दिलचस्पी रखने वाले लोग एक एपीएस‑सी फ़िल्टर (ND 5 या ND 3.8) लगाकर कैमरा से शॉट ले सकते हैं। याद रखें, लेंस को कभी भी सीधे सूर्य की रोशनी में न छोड़ें, नहीं तो सेंसर जल सकता है।
एक छोटी सी बात—अगर आप बच्चों के साथ देख रहे हैं तो उन्हें हमेशा फ़िल्टर वाले चश्मे पहनाएं और उनसे कहें कि बिना सुरक्षा उपकरणों के सूरज को ना देखें। इससे दुर्घटना की संभावना कम होगी।
आंशिक सूर्यग्रहण में क्या खास है?
सूर्य का सिर्फ एक हिस्सा ढँकना भी कई वैज्ञानिक संकेत देता है। यह दिखाता है कि चंद्रमा और पृथ्वी के बीच कौन‑से कोण बन रहे हैं, और किस दिशा से प्रकाश आ रहा है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में तापमान थोड़ा घट सकता है, पर आम तौर पर असर हल्का रहता है।
लोककथाएँ अक्सर सूर्यग्रहण को बुरे समय या शुभ संकेत मानती रही हैं। लेकिन आधुनिक विज्ञान ने साबित किया कि यह सिर्फ एक खगोलीय संरेखण है, जिसमें कोई अलौकिक प्रभाव नहीं होता। अगर आप इन बातों से डरते हों तो याद रखें—सिर्फ सुरक्षा उपकरण न पहनना ही जोखिम भरा है, बाकी सब सुरक्षित है।
आंशिक सूर्यग्रहण का आनंद लेने के बाद आप सोशल मीडिया पर अपने अनुभव शेयर कर सकते हैं, लेकिन फिर भी फोटो या वीडियो में सूरज को सीधे नहीं दिखाना चाहिए। इससे दूसरों को भी सुरक्षा की याद दिलाने में मदद मिलेगी।
तो तैयार हो जाइए, कैलेंडर में 14 अक्टूबर को मार्क करें और अपने परिवार या दोस्तों के साथ इस अद्भुत दृश्य को सुरक्षित रूप से देखें। अगर आप किसी शहर में नहीं हैं जहाँ कवरेज ज्यादा है, तो निकटतम स्थान पर यात्रा की योजना बना सकते हैं—जैसे उत्तर प्रदेश का प्रयागराज या बिहार का पटना। बस याद रखें, सुरक्षा पहले और बाद में आनंद!