बाबू जगजीवन राम की 117वीं जयंती पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हैदराबाद और मैसूर में उनके योगदान पर चर्चा हुई और भारत रत्न की मांग उठी। उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों और दलित समुदाय के लिए उनके संघर्ष को सराहा गया।
117वीं जयंति: क्या है खास और क्यों है महत्त्वपूर्ण?
आपने शायद पहले भी इस शब्द को देखा होगा, पर अक्सर नहीं जानते कि 117वੀਂ जयन्ति का असल मतलब क्या होता है। सरल भाषा में कहा जाये तो यह किसी घटना या संस्थान के स्थापित होने की 117वीं सालगिरह होती है। भारत में कई ऐतिहासिक घटनाएँ, स्कूल‑कॉलेज और राष्ट्रीय कार्यक्रम इस माइलस्टोन को मनाते हैं।
इतिहास में 117वाँ साल क्यों खास?
जब हम इतिहास की किताबें खोलते हैं तो पता चलता है कि कई बड़े बदलाव 117 वर्ष के अंतराल पर हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, 1908 में स्थापित कुछ स्कूल आज 117वीं जयन्ति मनाते हुए नई शिक्षा नीति को अपनाने का वादा करते हैं। इसी तरह 1906 में शुरू हुआ एक राष्ट्रीय आंदोलन भी इस साल अपना 117वाँ अध्याय लिख रहा था। इन घटनाओं से हमें यह समझ आता है कि हर दशक के बाद नया सत्र, नई ऊर्जा और अक्सर नई चुनौतियाँ सामने आती हैं।
आज का जश्न: कैसे मनाएँ आप?
अगर आपका स्कूल या संस्था इस साल 117वाँ वार्षिक उत्सव मना रहा है तो कुछ आसान तरीकों से इसे यादगार बना सकते हैं:
- स्मरणीय वीडियो बनायें – पुरानी तस्वीरों और पुराने रिकॉर्डिंग को आज के छात्रों की आवाज़ में जोड़कर एक छोटा डॉक्यूमेंट्री तैयार करें।
- आनलाइन प्रतियोगिताएँ – क्विज, कविता या ड्रॉइंग कॉन्टेस्ट आयोजित कर इतिहास के महत्वपूर्ण पलों को फिर से जीवंत बनायें।
- स्मारक पुस्तक – पिछले 117 सालों की उपलब्धियों का संकलन करके एक पुस्तक प्रकाशित करें और इसे सभी सदस्यों में बाँटें।
इन छोटे‑छोटे कदमों से न केवल उत्सव को मज़ेदार बनाते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी इस धरोहर की अहमियत समझ आती है।
दैनिक समाचार भारत पर अब तक प्रकाशित कई लेख इस टैग के तहत एक जगह इकट्ठा किए गए हैं – जैसे "US बाजार: डाउ नई ऊंचाई" से लेकर "IPL 2025 विवाद" तक। आप इन लेखों को पढ़कर न सिर्फ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की ताज़ा जानकारी ले सकते हैं, बल्कि यह भी देख सकते हैं कि 117वियों जयन्ती के आसपास किस‑किस खबर में इस शब्द का प्रयोग हुआ है।
अगर आप अपने स्थानीय क्षेत्र में किसी विशेष घटना की 117वीं जयंती की तलाश कर रहे हैं तो सर्च बॉक्स में "117वीं जयंति" टाइप करके तुरंत नवीनतम समाचार देख सकते हैं। अक्सर सरकारी प्रेस रिलीज़, स्कूल अल्बम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जानकारी इस टैग के अंतर्गत आती है।
संक्षेप में, 117वीं जयन्ती सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि इतिहास को दोबारा देखने, नई सोच लाने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का मौका देती है। तो अगली बार जब आप किसी कार्यक्रम में ‘117वीं’ शब्द सुनें, तो याद रखें कि यह सालगिरह कितनी गहरी कहानी बुनती है – और इसे अपने जीवन में भी अपनाएँ।