शनिवार देर रात बेंगलुरु से कोच्चि जा रहे एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान में टेक ऑफ के तुरंत बाद आग लगने से आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। विमान में सवार यात्रियों और चश्मदीद गवाहों के अनुसार, पायलट और क्रू ने आग देखते ही तुरंत कार्रवाई करते हुए इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
विमान आग: क्या होता है, क्यों होती है और हमें क्या करना चाहिए
हवाई सफ़र में कई लोग आराम से बैठते हैं, लेकिन कभी‑कभी अचानक एक छोटा सा जलना पूरी उड़ान को खतरे में डाल सकता है। ऐसी स्थिति के बारे में जानना ज़रूरी है—ताकि आप शांति से यात्रा कर सकें और अगर कुछ हो भी जाए तो तुरंत सही कदम उठा सकें।
विमान में आग क्यों लगती है?
सबसे आम कारण इंधन रिसाव या इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट होते हैं। इंजन के पास रखे हुए टैंकों से अगर थोड़ा‑बहुत ईंधन लीक हो जाए और कोई स्पार्क मिल जाए, तो आग लग सकती है। कभी‑कभी किचेन में इस्तेमाल होने वाले गैस स्टोव या बर्तनों की लाइटर भी समस्या बनती है, खासकर जब उनका उपयोग सही तरीके से नहीं किया जाता।
एक और कारण है एयरक्राफ्ट के अंदर रखे हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—जैसे लैपटॉप या मोबाइल चार्जर—अगर ठीक से प्लग न किए हों तो ओवरहीटिंग हो सकती है। अधिकांश एयरलाइन ये बात यात्रियों को पहले ही बता देती हैं, लेकिन कभी‑कभी ध्यान नहीं रहता।
आग लगने पर क्या करें?
सबसे पहला काम है पैनिक न करना। शांत रहना सबसे बड़ा उपाय है क्योंकि तभी आप सही निर्णय ले पाएँगे। यदि आप सीटबेल्ट बंधे हैं, तो तुरंत अपना सीट बेल्ट खोलें और निकास की ओर बढ़ें—ज्यादातर एयरक्राफ्ट में निकासी मार्ग स्पष्ट रूप से दिखाए होते हैं।
यदि आग छोटा है, तो एयरोनॉटिकल स्टाफ द्वारा दिया गया फ़ायर एक्सटिंगुशर (आग बुझाने वाला) इस्तेमाल कर सकते हैं। ये उपकरण दरवाज़े के पास या गैलरी में रखे होते हैं। पर अगर आग बहुत बड़ी हो, तो तुरंत कम्बैड कर्टेन नीचे लटकाएँ और धुआँ बाहर निकलने दें—सिस्टम अक्सर फायर कंट्रोल वैल्व को एकटिवेट कर देता है।
ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने पास रखे गैस सिलेंडर, लैपटॉप या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक चीज़ को तुरंत निकालें और सुरक्षित जगह पर रखें। इससे आग के फैलने का जोखिम कम हो जाता है।
भूले नहीं, एयरोनॉटिकल स्टाफ की बात सुनना सबसे ज़्यादा जरूरी है—वे प्रशिक्षित होते हैं और अक्सर स्थिति को संभालने में तेज़ी से काम करते हैं। उनके संकेतों पर तुरंत प्रतिक्रिया दें।
हवाई यात्रा के दौरान आपातकालीन स्थितियों की तैयारी रखना अनिवार्य है, लेकिन यह भी याद रखें कि ऐसी घटनाएँ बहुत दुर्लभ होती हैं। एयरलाइन्स लगातार सुरक्षा उपायों को अपडेट करती रहती हैं और नई तकनीक अपनाती हैं—जैसे इंटेलिजेंट फ़ायर डिटेक्शन सिस्टम और स्वचालित एग्ज़ॉस्ट कंट्रोल्स। इनकी वजह से अधिकांश छोटी‑छोटी आगें तुरंत ही बुझा दी जाती हैं।
तो अगली बार जब आप विमान में चढ़ेंगे, तो अपने सीट बेल्ट को ठीक से बाँध लें, निकासी मार्ग देख लें और यदि कोई फ़ायर एलेर्ट बटन दिखाई दे तो उसकी जगह याद रख लें। ये छोटे‑छोटे कदम आपकी यात्रा को सुरक्षित बनाते हैं और आपको मन की शांति देते हैं।
विमान में आग एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन सही जानकारी और तैयारी से इसे आसानी से संभाला जा सकता है। दैनिक समाचार भारत पर ऐसी ही उपयोगी खबरें पढ़ते रहें और अपने सफ़र को सुरक्षित बनाएं।