वाराणसी लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 33,000 वोटों से आगे चल रहे हैं। मोदी ने अब तक 1,14,810 वोट प्राप्त किए हैं, जबकि उनके विपक्षी कांग्रेस के अजय राय ने 81,604 वोट हासिल किए हैं। इस चुनाव में उच्च मतदान देखा गया, और मोदी का लक्ष्य 10 लाख वोटों के अंतर से जीतना है।
वाराणसी चुनाव: ताज़ा खबरें और क्या देखना चाहिए
हर बार वाराणसी से लोकसभा सीट पर बड़ी दिलचस्पी रहती है क्योंकि यहाँ के मतदाता राष्ट्रीय स्तर की राजनीति को सीधे असर देते हैं। अगर आप इस चुनाव के बारे में जल्दी‑से‑जल्दी जानना चाहते हैं, तो नीचे दिया गया गाइड पढ़िए – इसमें प्रमुख उम्मीदवारों, मुद्दों और वर्तमान सर्वेक्षणों का आसान सारांश मिलेगा।
मुख्य उम्मीदवार कौन-कौन हैं?
बाजारपेठ में सबसे ज्यादा चर्चा नरेंद्र मोदी के विरोधी अय्यर सिंह की है, जो भाजपा के गठबंधन से बाहर होकर स्वतंत्र रूप से लड़ेगा। उनका मुख्य दावा ‘स्थानीय विकास’ और ‘धर्मिक एकता’ है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता अमित शाह को समर्थन दिया, लेकिन असली चेहरा अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ – कई रिपोर्टें बताती हैं कि भाजपा का चयनित उम्मीदवार स्थानीय युवा वर्ग से जुड़ी ताकत पर आधारित होगा।
कांग्रेस ने भी वाराणसी में अपना दांव खेला है; उनके पास अनुभवी राजनैतिक खिलाड़ी विजय पांडे हैं, जो 1990‑के दशक से इस क्षेत्र के राजनीति में सक्रिय हैं। उनका फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर है। इसके अलावा कुछ छोटे दलों ने भी गठबंधन की कोशिशें शुरू कर दीं, जैसे कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का स्थानीय नेता राजेश शुक्ला, जो ग्रामीण वोट को आकर्षित करने के लिए ‘किसान राहत’ को मुख्य मुद्दा बना रहे हैं।
मतदान के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
वाराणसी में मतदाता दो बड़े सवालों पर तर्क करते दिखते हैं – विकास और सांस्कृतिक पहचान। पहला, शहर की बुनियादी ढाँचे जैसे कि सड़कें, जलापूर्ति और स्वच्छता योजनाएँ अभी भी कई क्षेत्रों में अधूरी हैं। दूसरी ओर, काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास की सुरक्षा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना सभी पार्टियों का प्रमुख एजेंडा है।
आर्थिक पहलू भी कम नहीं है; स्थानीय छोटे व्यापारियों ने कहा कि पिछले दो वर्षों में बाजार में मंदी आई है और सरकार से नई निवेश योजनाओं की उम्मीद रखते हैं। युवा वर्ग रोजगार के अवसरों, विशेषकर डिजिटल स्किल्स और स्टार्ट‑अप सपोर्ट पर बात कर रहा है। इन मुद्दों को लेकर सर्वेक्षण बताते हैं कि अगर कोई पार्टी ठोस योजना पेश करे तो वह वोट जीतने में आगे रहेगी।
सुरक्षा भी एक अहम विषय बन गया है क्योंकि वाराणसी के पास कई प्रमुख रेलवे और हाईवे कनेक्शन हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा मामलों की चर्चा अक्सर स्थानीय चुनावी रैलियों में दिखाई देती है, खासकर जब केंद्रीय सरकार का प्रदर्शन देखना होता है।
सर्वेक्षणों से क्या संकेत मिलते हैं?
अभी तक कोई आधिकारिक परिणाम नहीं आया, लेकिन हालिया सर्वे ने दिखाया कि भाजपा को 45‑48% समर्थन मिला है, जबकि अय्यर सिंह के स्वतंत्र मोर्चे पर 15‑18% वोट की उम्मीद है। कांग्रेस और बीएसपी मिलकर लगभग 20% संभावित वोटर्स को कवर कर रहे हैं। इन आँकड़ों में यह बात साफ दिखती है कि यदि कोई नई गठबंधन या साइडिंग बनती है तो परिणाम बदल सकता है।
एक बात ध्यान देने योग्य है – युवा मतदान में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, और उनका झुकाव अक्सर पार्टी की नीतियों के बजाय उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि पर रहता है। इसलिए चुनाव अभियान में सोशल मीडिया का उपयोग, छोटे वीडियो क्लिप और सीधे संवाद बहुत मायने रखेंगे।
अंत में, वाराणसी चुनाव सिर्फ एक लोकसभा सीट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का मापक माना जाता है। चाहे आप वोटर हों या राजनीतिक विश्लेषक, इस बार की बारीकी से देखना जरूरी है – उम्मीदवारों के प्रोफ़ाइल, मुद्दे और सर्वेक्षण सभी मिलकर परिणाम तय करेंगे। अगर आप अधिक अपडेट चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट ‘दैनिक समाचार भारत’ पर लगातार ताज़ा समाचार पढ़ते रहें।