पेरिस 2024 ओलंपिक खेल कल से शुरू हो रहे हैं, जो 11 अगस्त तक चलेंगे। ये 33वें ओलंपिक खेल हैं, जहां पेरिस ने अपने प्रमुख स्थलों को खेल स्थलों में बदला है। इन खेलों में 200 से अधिक राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों (NOCs) और IOC शरणार्थी ओलंपिक टीम के लगभग 10,500 एथलीट हिस्सा लेंगे।
नेशनल ओलंपिक कमिटीज़: खेलों का दिलचस्प संसार
जब हम ऑलिम्पिक खेल देखते हैं तो अक्सर नहीं सोचते कि पीछे कौन‑सी संस्था इस सब को सम्भालती है। वही संस्थाएँ नॅशनल ओलम्पिक कमिटी (NOC) कहलाती हैं। उनका काम सिर्फ खिलाड़ियों का चयन नहीं, बल्कि पूरी तैयारी, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बनाना भी है। अगर आप खेल प्रेमी हैं तो जानना जरूरी है कि ये समिति आपके पसंदीदा एथलीटों को कैसे समर्थन देती है।
नॅशनल ओलम्पिक कमिटीज़ क्या होती हैं?
NOC हर देश में एक मान्यता प्राप्त संस्था होती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऑलिम्पिक कमिटी (IOC) ने मंजूरी दी होती है। इनके प्रमुख कार्यों में राष्ट्रीय स्तर पर खेल योजनाएँ बनाना, कोचिंग सुविधाएं देना और ओलीम्पिक चयन प्रक्रिया चलाना शामिल है। वे सरकार, निजी कंपनियों और स्पोर्ट्स फाउंडेशनों से फंड लेकर एथलीटों के ट्रेनिंग कैंप, मेडिकल सपोर्ट और उपकरणों का प्रबंध करते हैं।
एक और महत्वपूर्ण काम उनका अंतरराष्ट्रीय नियमों को अपनाने में मदद करना है। जैसे डोपिंग कंट्रोल या बायोमेहिकल टेस्ट—इन सबका पालन NOC सुनिश्चित करती है ताकि हमारे खिलाड़ी विश्व मंच पर बेधड़क खेल सकें। अक्सर आप देखते हैं कि छोटे शहर के टैलेंटेड एथलीट राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से निकल कर ओलम्पिक में पहुंचते हैं, इसका बड़ा हाथ NOC का होता है।
भारत की राष्ट्रीय ऑलिम्पिक समिति (IOA) का काम कैसे चलता है?
भारत में भारतीय ऑलिंपिक कमेटी (IOA) इस भूमिका को निभाती है। IOA हर चार साल में होने वाले ओलीम्पिक के लिए चयन प्रक्रिया, ट्रेनिंग प्लान और फंड वितरण तय करती है। उनका मुख्य लक्ष्य एथलीटों को विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके लिये वे भारतीय खेल मंत्रालय, निजी स्पॉन्सर और राज्य सरकारों से मिलकर बजट तैयार करते हैं।
IOA के पास कई उप‑संस्थाएँ भी हैं—जैसे एथलेटिक्स फ़ेडरेशन, हॉकी फेडरेशन आदि—जो अपने‑अपने खेल में विशेषज्ञता लाते हैं। ये सब मिल कर राष्ट्रीय स्तर पर चयन ट्रायल आयोजित करते हैं और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को ओलम्पिक टीम में जगह दिलाते हैं। साथ ही, IOA अक्सर खिलाड़ियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस, मनोवैज्ञानिक सलाह और हाई‑टेक ट्रेनिंग उपकरण भी उपलब्ध कराती है।
अगर आप युवा एथलीट हैं तो आपको IOA की आधिकारिक वेबसाइट या राज्य खेल परिषद से संपर्क करना चाहिए। वहां पर ट्रायल डेट्स, फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी मिलती है। अक्सर छोटे‑छोटे टैलेंट स्काउटिंग प्रोग्राम भी होते हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर संभावनाओं को पहचानते हैं—यही कारण है कि भारत के कई ओलम्पिक मेडलिस्ट गांव से आते हैं।
एक बात और याद रखें: NOC सिर्फ एथलीटों का समर्थन नहीं करती, वो पूरे खेल इकोसिस्टम को बेहतर बनाती है। स्कूल‑कॉलेज में स्पोर्ट्स प्रोमोशन, कोचिंग सर्टिफिकेशन और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास भी इनके दायरे में आता है। इस वजह से देश में खेल का स्तर धीरे‑धीरे बढ़ रहा है और भविष्य में हम ज्यादा मेडल की उम्मीद कर सकते हैं।
तो अगली बार जब आप ओलम्पिक देखेंगे, तो सिर्फ जीत या हार पर नहीं, बल्कि उन लोगों के काम को भी सराहें जो पर्दे के पीछे मेहनत करके एथलीटों को तैयार करते हैं। यही नॅशनल ओलम्पिक कमिटीज़ की असली ताकत है—खेल को हर घर तक पहुँचाना और हमारे हीरो बनाना।