डाउ नए शिखर के पास दिखा, जबकि टेक-हैवी नैस्डैक की रफ्तार धीमी रही। संकेत साफ हैं—निवेशक टेक से निकलकर औद्योगिक, वित्तीय और डिविडेंड देने वाले शेयरों में शिफ्ट हो रहे हैं। बॉन्ड यील्ड, रेट-कट उम्मीदें और कमाई का सीजन इस रोटेशन को दिशा दे रहे हैं। आगे CPI-PCE डेटा, डॉलर की चाल और AI-संबंधित कमाई बाजार मूड तय करेंगे।
नैस्डैक – क्या है, कैसे काम करता है और भारतीय निवेशकों को क्यों चाहिए?
अगर आप शेयर बाजार में रुचि रखते हैं तो शायद आपने नैस्डैक का नाम सुना होगा। ये अमेरिका की एक इलेक्ट्रॉनिक एक्स्चेंज है जहाँ टेक‑गिगां जैसे Apple, Amazon, Google (Alphabet) के शेयर ट्रेड होते हैं। भारत में भी कई लोग इस मार्केट को देख कर निवेश करते हैं क्योंकि यहाँ के इंडेक्स अक्सर तेज़ी दिखाते हैं और नई कंपनियों का प्रवेश आसान होता है।
नैस्डैक के प्रमुख इंडेक्स
नैस्डैक दो बड़े‑बड़े इंडेक्स चलाता है – Nasdaq Composite और Nasdaq‑100. Composite में 3000 से ज्यादा कंपनियां शामिल हैं, इसलिए यह मार्केट की पूरी तस्वीर देता है। Nasdaq‑100 सिर्फ सबसे बड़ी 100 गैर‑वित्तीय कंपनियों को दिखाता है, जिनमें टेक, बायोटेक और कंज्यूमर सर्विसेज़ प्रमुख होते हैं। इन दोनों इंडेक्सों के ऊपर-नीचे होने से आपको पता चलता है कि टॉप‑टेक सेक्टर कैसे परफॉर्म कर रहा है।
भारत में नैस्डैक तक कैसे पहुंचें?
सीधे तौर पर भारतीय निवेशक नैस्डैक में शेयर नहीं खरीद सकते, लेकिन दो आसान रास्ते हैं: एक तो विदेशी फंड (अमेरिकन म्यूचुअल फंड या ETFs) के माध्यम से। दूसरा है लिस्टेड फ़िनैंशियल प्रॉडक्ट्स जैसे कि Nifty Nasdaq 100 ETF जो भारतीय स्टॉक एक्स्चेंज पर ट्रेड होता है। इन दोनों विकल्पों में कम ब्रोकरेज फीस और आसान कर प्रोसेसिंग मिलती है, इसलिए शुरुआती लोग इन्हें पसंद करते हैं।
नैस्डैक का हालिया प्रदर्शन देखते हुए 2023‑24 में टेक सेक्टर की रिटर्न लगभग 20 % रही थी। 2025 तक कई विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि AI और क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनियों के कारण इंडेक्स फिर से उछाल दिखाएगा। इसलिए यदि आप दीर्घकालिक निवेश सोचते हैं तो नैस्डैक‑आधारित फंड आपके पोर्टफोलियो में विविधता जोड़ सकते हैं।
शुरुआती निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए: पहले अपनी रिस्क प्रोफ़ाइल समझें, फिर छोटे एंट्री पॉइंट से शुरुआत करें और नियमित रूप से पोर्टफ़ोलियो रिव्यू करें। अगर आप स्टॉक चुनना नहीं चाहते तो एक बैलेंस्ड ETF (जैसे Nifty Nasdaq 100) में हर महीने समान रकम डाल सकते हैं – यह डॉलर‑कोस्ट एवरेजिंग की तरह काम करता है और मार्केट वॉलेट को स्मूथ रखता है।
एक और टिप: वैध ब्रोकर चुनें जो विदेशी एक्स्चेंज तक पहुँच प्रदान करे और सभी डाक्यूमेंट्स जैसे PAN, Aadhaar ठीक से अपलोड करें। कुछ ब्रोकरों में कर कट‑ऑफ़ की सुविधा भी होती है, जिससे साल के अंत में टैक्स फ़ाइलिंग आसान हो जाती है।
अंत में यही कहना चाहूँगा कि नैस्डैक सिर्फ बड़े टेक कंपनियों का घर नहीं, बल्कि भारतीय निवेशकों को ग्लोबल रिटर्न हासिल करने का एक सरल रास्ता भी है। सही जानकारी और सावधानी से आप इस मार्केट के फायदे उठा सकते हैं। अब जब आपको बेसिक समझ आ गई है तो अपनी वित्तीय योजना में नैस्डैक‑फोकस्ड एसेट्स जोड़ने पर विचार जरूर करें।