जॉर्डन ने गाजा से 3,000 हमास नेताओं को निर्वासित करने और प्रतिरोध को खत्म कर गाजा का नियंत्रण फिलीस्तीनी प्राधिकरण को सौंपने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को लेकर कई विवाद उभर आए हैं, जबकि जॉर्डन के विदेश मंत्री ने इस योजना से इनकार किया है। गाजा में इजरायली हमलों के बीच यह कदम सामने आया है।
हमास: मूल, लक्ष्य और आज की भूमिका
अगर आप अक्सर समाचार देखते हो तो ‘हामास’ नाम सुनते ही दिमाग में इज़राइल‑फ़िलिस्तीन झड़प आती है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह समूह कहाँ से आया और उसका असली मकसद क्या है? चलिए सरल शब्दों में समझते हैं।
स्थापना और विचारधारा
हमास की स्थापना 1987 में हुई, जब पहला इंटिफ़ादा (फ़िलिस्तीनियों का विद्रोह) छिड़ा था। यह मूलतः एक इस्लामी संगठन है, जिसका मतलब है कि इसे धर्म के आधार पर फ़िलिस्तीनी अधिकारों को बचाना अपना काम मानता है। इसकी दो मुख्य शाखाएँ हैं – राजनीतिक दल और सशस्त्र विंग (इज़ अल‑दीना अल‑कस्साम)। राजनीतिक पक्ष चुनाव में भाग लेता है, जबकि सशस्त्र हिस्से का लक्ष्य इज़राइल के खिलाफ लड़ाई करना रहता है।
इज़राइल‑फ़िलिस्तीन संघर्ष में भूमिका
हैमास की सबसे बड़ी पहचान उसके गाज़ा पट्टी पर नियंत्रण से आती है। 2007 में इसने सशस्त्र जमीनी ताकत के ज़रिए हथीबा को बाहर कर दिया और तब से गाज़ा का शासक बना हुआ है। यही कारण है कि हर बार इज़राइल की सैन्य प्रतिक्रिया या अंतरराष्ट्रीय वार्ता में हमास को मुख्य किरदार माना जाता है। अक्सर कहा जाता है, ‘हमास की रॉकेट बाड़ें और इज़राइल की एंटी‑मिसाइल प्रणाली’ एक दूसरे के साथ खेलते हैं – यही स्थिति तनाव को बढ़ा देती है।
समय-समय पर हमास ने राजनैतिक वार्ताओं में भी भाग लिया, जैसे 2014 का संयुक्त राष्ट्र फ़्रेमवर्क या कतर की मध्यस्थता वाले समझौते। लेकिन अक्सर शर्तें टेढ़ी‑मेढ़ी रहती हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच भरोसा बनना मुश्किल हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने हमास को आतंकवादी समूह घोषित किया है, जबकि कुछ अरब देश और तुर्की इसे फ़िलिस्तीन की वैध आवाज़ मानते हैं। यही विरोधाभास उसके वित्तीय स्रोतों को भी जटिल बनाता है – निजी दान, विदेशी सहयोगियों के फंड और गाज़ा में खुद की टैक्स जैसी चीजें मिलकर बजट तैयार करती हैं।
आज हमास का मुख्य लक्ष्य दो चीज़ें रखता है: एक तो फ़िलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र बनाना, और दूसरा इज़राइल के खिलाफ प्रतिरोध जारी रखना। इस लक्ष्य के पीछे सामाजिक सेवाएँ भी शामिल हैं – अस्पताल, स्कूल और जल व्यवस्था चलाते हैं, जिससे स्थानीय लोग अक्सर इसे ‘सरकार’ की तरह देखते हैं।
यदि आप समाचार में हमास का उल्लेख देखें तो याद रखें कि यह सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि राजनीति, सामाजिक कार्य और धार्मिक विचारों का मिश्रण है। इसके कारण ही मध्य पूर्व के नक्शे पर लगातार बदलते समीकरण बने रहते हैं। इस समझ से आप न केवल ख़बरें पढ़ पाएँगे, बल्कि उसके पीछे की जटिलताओं को भी समझ सकेंगे।