अमेरिकी फेडरल रिजर्व 18 सितंबर, 2024 को अपना दो दिवसीय बैठक के समापन पर चार सालों में पहली बार ब्याज दर कटौती की घोषणा करने के लिए तैयार है। फेड चेयर जेरोम पॉवेल दर कटौती की सीमा का खुलासा करेंगे। नीतिगत निर्धारक महंगाई को 2% पर लाने की ओर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
ब्याज दर कटौतियों के बारे में सब कुछ – क्या बदलता है आपके पैसे का हाल
हर बार जब RBI या फेडरल रिज़र्व ब्याज दर घटाते हैं, तो आम लोग सोचते हैं ‘अच्छा, लोन सस्ता होगा’। लेकिन असल में ये बदलाव किस तरह से आपके बचत खाते, गृहकर्ज़ और शेयर बाजार को प्रभावित करता है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि दर कटौती का असर रोज़मर्रा की जिंदगी में कैसे पड़ता है।
दर घटाने के पीछे कौन‑सी वजह होती है?
ब्याज दर तब घटती है जब सरकार को अर्थव्यवस्था को तेज़ी से चलाना होता है। अगर महंगाई बहुत ज़्यादा हो रही हो या रोजगार की कमी महसूस हो, तो RBI कम ब्याज लेकर कर्ज़ लेना आसान बनाता है। इससे कंपनियां और लोग दोनों ही ज्यादा खर्च करेंगे – नई कार खरीदेंगे, घर बनाएंगे या बिजनेस में निवेश बढ़ाएंगे। इस तरह से आर्थिक गति फिर से तेज़ होती है।
आपके लोन और बचत पर सीधा असर
सबसे पहले बात करते हैं लोन की। जब ब्याज दर घटती है, तो मौजूदा लोन का ईएमआई (EMI) कम हो जाता है या नया लोन लेना सस्ता पड़ता है। इसका मतलब है आप हर महीने थोड़ा बचत कर पाएंगे – चाहे वो घर का कर्ज़ हो या पर्सनल लोन। दूसरी तरफ, बचत खातों पर मिलने वाला ब्याज भी घट जाता है, तो आपके जमा किए पैसे की कमाई थोड़ी कम हो सकती है। इसलिए दर कटौती के बाद दोनों पहलुओं को संतुलित देखना ज़रूरी है – कभी-कभी नई फ़िक्स्ड डिपॉज़िट या म्यूचुअल फंड में निवेश बेहतर रहता है।
शेयर मार्केट भी इस बदलाव से कम नहीं बचता। कम ब्याज दरें कंपनियों के लिए कर्ज़ लेना आसान बनाती हैं, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बढ़ सकता है। इसका असर शेयरों की कीमतों में इज़ाफा के रूप में दिखता है, खासकर उन सेक्टर्स में जो पूँजी खर्चे पर निर्भर होते हैं – जैसे रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल। लेकिन अगर महंगाई फिर से तेज़ हो जाए तो RBI दरें बढ़ा सकता है, इसलिए निवेशकों को हमेशा अपडेट रहना चाहिए।
एक बात ध्यान में रखें: ब्याज दर कटौती का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग पड़ता है। जिनका बड़ा लोन बकाया है, उन्हें तुरंत फायदेमंद लगता है; जबकि छोटे बचतकर्ता को थोड़ा कम ब्याज मिल सकता है। इसलिए अपनी वित्तीय योजना बनाते समय दोनों पहलुओं को संतुलित करना जरूरी है – लोन रीफ़ाइनेंसिंग या अतिरिक्त बचत के विकल्पों पर विचार करें।
अंत में, अगर आप इस बार की दर कटौती से लाभ उठाना चाहते हैं तो तुरंत बैंक से संपर्क करके मौजूदा लोन का रिवर्समेंट या नई फ़िक्स्ड डिपॉज़िट योजना के बारे में पूछें। साथ ही, बाजार में चल रहे बदलावों को ट्रैक रखें और अपने निवेश पोर्टफ़ोलियो को समय‑समय पर रीबैलेंस करें। ऐसा करने से आप न केवल बचत करेंगे बल्कि आर्थिक उतार‑चढ़ाव से भी सुरक्षित रहेंगे।