बाज़ार स्टाइल रिटेल के आईपीओ को दूसरे दिन 4.6 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। कंपनी का उद्देश्य ₹1,200 करोड़ जुटाना है। रिटेल सेक्शन में 6.7 गुना सब्सक्रिप्शन हुआ है जबकि क्यूआईबी और नॉन-इंस्टिट्यूशनल निवेशक सेगमेंट में क्रमशः 2.5 और 2.3 गुना सब्सक्रिप्शन देखा गया है। जीएमपी ₹20 से घटकर ₹15 हो गई है।
आईपीओ क्या होता है?
जब कोई कंपनी पहली बार अपना शेयर जनता को बेचती है, तो उसे आईपीओ कहा जाता है। इस प्रक्रिया से कंपनी को पूँजी मिलती है और निवेशकों को नई कंपनियों में भागीदारी का मौका मिलता है। साधारण भाषा में सोचें – आप किसी नए रेस्तरां या ऐप के हिस्से खरीद रहे हैं, ताकि जब वह सफल हो तो उसका फायदा आपको भी मिले।
आईपीओ कैसे काम करता है?
सबसे पहले कंपनी एक निवेश बैंक को नियुक्त करती है जो शेयर की कीमत तय करने में मदद करता है। फिर इस कीमत के आधार पर आरएसए (रजिस्टरेड सोर्सिंग एजेंट) के पास आवेदन जमा होते हैं। यदि सभी आवेदन पूरी हों तो शेयर बंटे जाते हैं, नहीं तो रिटर्न किया जाता है। यह प्रक्रिया कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक चल सकती है।
ध्यान रखें – आईपीओ में भाग लेने के लिए आपका डीमैट खाता होना ज़रूरी है। बिना खाते के आप शेयर नहीं रख पाएंगे और न ही ट्रेडिंग कर सकेंगे। अधिकांश बड़े ब्रोकर्स ऑनलाइन पोर्टल पर आसान फॉर्म भरने का विकल्प देते हैं, तो बस अपना पैन कार्ड, आधार व बैंक अकाउंट लिंक करके तैयार हो जाएँ।
निवेश करने से पहले किन बातों को देखें?
1. कम्पनी की बिजनेस मॉडल: क्या कंपनी का प्रोडक्ट या सर्विस बाजार में मांग रखती है? अगर नहीं, तो शेयर मूल्य घट सकता है।
2. फंड्स का उपयोग: अक्सर कंपनियां बताएँगी कि जुटाए गए पैसे से कौन‑से प्रोजेक्ट चलेंगे। यदि विस्तार या ऋण कम करना है, तो यह सकारात्मक संकेत हो सकता है।
3. डिमांड–सप्लाई: अगर बहुत ज्यादा लोग शेयर खरीदना चाहते हैं और सब्सक्राइब्ड क़ीमत कम है, तो प्राइस एन्हैंसमेंट की संभावना बढ़ती है – यानी पहले से तय कीमत से ऊपर बिक सकता है।
4. प्रबंधन टीम: अनुभवी और विश्वसनीय नेतृत्व कंपनी को स्थिर रखता है। छोटे‑छोटे स्कैम अक्सर अनभिज्ञ प्रबंधन के कारण होते हैं।
5. रिस्क फॅक्टर्स: नई कंपनियों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है, इसलिए आप जितना नुकसान सहन कर सकते हैं, वही निवेश करें। पूरे पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा आईपीओ में रखें – इससे बड़ा घाटा नहीं होगा।
अभी तक कई भारतीय कंपनियों ने सफलतापूर्वक आईपीओ लॉन्च किया है – जैसे ज़ोमैटो, बायजूस, और ओयो। इनकी शुरुआती कीमतें कभी‑कभी तेज़ी से बढ़ती हैं, पर कुछ केस में प्राइस गिर भी जाता है। इसलिए केवल हंगामे या अफवाहों के आधार पर नहीं, बल्कि ऊपर बताए गए मानकों को देख कर फैसला लें।
अंत में एक बात याद रखें – शेयर बाजार में कोई गारंटी नहीं होती। आईपीओ आपके लिए नई संभावनाओं की दरवाज़ा खोल सकता है, लेकिन सही जानकारी और सावधानी से ही आप लाभ उठा पाएँगे। तो अगली बार जब कोई नया IPO आए, इन बिंदुओं को चेक करके अपने निवेश को सुरक्षित बनाइए।