उत्तराखंड ने व्यावसायिक गैस क्वोटा दोगुना कर दिया, नई SOP लागू

उत्तराखंड ने व्यावसायिक गैस क्वोटा दोगुना कर दिया, नई SOP लागू

मार्च, 26 2026

देहरादून से एक खास खबर है जहाँ रेस्तराँ और होटलों के मालिकों को राहत मिलने वाली है। उत्तराखंड सरकार ने आधिकारिक तौर पर व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों का क्वोटा दोगुना करने का फैसला लिया है। यह निर्णय सीधी अर्थव्यवस्था को लक्षित करता है, खासकर तब जब राज्य में पर्यटन और तीर्थयात्राओं का मौसम चल रहा हो।

सरकार ने मार्च 2026 की शुरुआत में ही नई स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर (एसओपी) जारी कर दी है। इस नई योजना के तहत रोजाना 2,650 व्यावसायिक सिलेंडर वितरित किए जाएंगे। यानी जो पहले 20 प्रतिशत था, वह अब 40 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। यह बड़ी बात इसलिए क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पैनिक बुकिंग का माहौल देखने को मिला था।

विभिन्न क्षेत्रों में सिलेंडरों का बंटवारा

बहुत सी बार ऐसे नियम आते हैं जो कागज पर तो ठीक लगते हैं, लेकिन जमीन पर थोड़े भ्रम पैदा करते हैं। लेकिन इस बार सरकार ने काफी स्पष्टता दिखाई है। विभाग का कहना है कि कुल आवंटन को कई श्रेणियों में बांटा जाएगा। होमस्टे और स्वयं सहायता समूहों के लिए अब रोजाना 260 सिलेंडर उपलब्ध होंगे, जो पहले 130 थे। छात्रों की पेइंग गैस्ट हाउसें के लिए 300 सिलेंडर तय किए गए हैं।

रेस्तरां और धाबे के मालिकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि उनकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है—दरअसल, 2,000 सिलेंडर दिन भर इनके लिए ही रखे गए हैं। होटल और रिसॉर्ट्स को 1,500 सिलेंडर दिए जाएंगे। औषधि कंपनियों को भी नहीं भुलाया गया है, उन्हें रोजाना 380 सिलेंडर मिलेंगे। इंडस्ट्रियल कैंटीन और डेयरी यूनिट्स का भी खास इंतजाम किया गया है ताकि किसी को भी कहीं पर भी गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

जिलावार बंटवारे का नक्शा

यही नहीं, जिलों के हिसाब से भी एक बहुत ही बेहतरीन प्लानिंग की गई है। जो लोग देहरादून में हैं, उनके लिए यह सबसे बड़ी खुशी का सबब होगा। देहरादून को सबसे ज्यादा 31 प्रतिशत सिलेंडर मिल रहे हैं। हरिद्वार और नैनीताल दोनों को 13-13 प्रतिशत हिस्सेदारी मिल रही है।

भारतीय तेल निगम (IOCL), भारती पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) — ये तीन कंपनियां मिलाकर पूरी जिम्मेदारी संभालेंगी। इनका वर्तमान बाजार भाग (market share) ध्यान में रखते हुए ही सप्लाई तय की गई है। रुद्रप्रयाग को 5 प्रतिशत और तेहरी, पौड़ी, उतтарकाशी जैसे जिलों को 4-4 प्रतिशत आवंटन मिला है।

मुख्य सचिव का आदेश और कालाबाजरी पर रोक

मुख्य सचिव का आदेश और कालाबाजरी पर रोक

सीधी बात यह है कि सरकारी अधिकारियों ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। अनंत बर्धन, मुख्य सचिव, ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। उनका कहना था कि उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए और ब्लैक मार्केटिंग की सख्त कार्रवाई होगी। अनंत স্বাrup, सिवा (Food Dept Secretary), ने भी इस SOP को अंतिम रूप दिया है।

अजीब यह है कि घरेलू गैस की सप्लाई ठीक है, लेकिन लोगों ने अपने पास सिलेंडर जमा कर रखने (hoarding) की वजह से ही इसमें दिक्कत आ रही थी। मुख्यमंत्री ने भी एक रेस्तरां का दौरा किया और कहा कि इस चुनौती का सामना मिलकर करना होगा। यदि हम कच्चा काम करेंगे तो बिना किसी नुकसान के चारधाम यात्रा और सर्दियों का पर्यटन सीजन पार कर सकते हैं।

भविष्य की रोशनी

भविष्य की रोशनी

इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने भी सपोर्ट किया है। वे कहते हैं कि अगर राज्य सरकार पाइपलाइन गैस के काम को तेज करती है, तो उन्हें अतिरिक्त 10 प्रतिशत क्वोटा भी मिल सकता है। यह एक अच्छा मोटा है। अभी हालात थोड़े अलग दिख रहे हैं, लेकिन यदि सही निगरानी हुई तो यह सिस्टम सालों साल काम करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्यावसायिक गैस क्वोटा में कितनी वृद्धि हुई है?

सरकार ने व्यावसायिक गैस की क्वांटिटी को पहले के 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। इसके तहत अब रोजाना 2,650 सिलेंडरों का वितरण राज्य में होने वाला है।

कौन से जिलों को सबसे ज्यादा सिलेंडर मिल रहे हैं?

देहरादून को सबसे ज्यादा 31 प्रतिशत आवंटन मिल रहा है। इसके बाद हरिद्वार और नैनीताल को 13-13 प्रतिशत सिलेंडरों का प्रावधान बनाया गया है।

गैस आपूर्ति के लिए जिम्मेदार कौन सी कंपनियां हैं?

आईओसीएल (IOCL), बीपीसीएल (BPCL), और एचपीसीएल (HPCL) ये तीन कंपनियां मिलकर इस नई योजना के तहत आपूर्ति का काम संभालेंगी।

क्या कालाबाजरी पर कोई कार्रवाई होगी?

हां, मुख्य सचिव अनंत बर्धन ने आदेश दिया है कि यदि कालाबाजरी या हार्डिंग पाया गया, तो सख्त कार्रवाई होगी और आपूर्ति बाधित नहीं होने देंगे।