Orient Technologies के आईपीओ की अलॉटमेंट प्रक्रिया आज पूरी होगी। यह आईपीओ 21 अगस्त से 23 अगस्त के बीच ओपन था और इसे निवेशकों से जोरदार प्रतिक्रिया मिली। इस आईपीओ के तहत कुल 213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। निवेशक अपने अलॉटमेंट स्टेटस को Link Intime India या बीएसई की वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं।
IPO अलॉटमेंट क्या है? आसान भाषा में समझिए
जब कोई कंपनी शेयर बाजार में पहली बार अपने शेयर बेचना चाहती है, तो उसे IPO (Initial Public Offering) कहते हैं. इस प्रक्रिया में हर निवेशक को कितने शेयर मिलेंगे, यही तय होता है – इसे ही अलॉटमेंट कहा जाता है. आमतौर पर आपके आवेदन के आधार पर एक एल्गोरिद्म चलाकर शेयर बांटे जाते हैं.
अलॉटमेंट की खबरें अक्सर तेज़ी से आती‑जाती रहती हैं, इसलिए सही टाइम पर जानकारी देखना ज़रूरी होता है. अगर आप पहली बार IPO में भाग ले रहे हैं तो समझें कि ब्रोकर या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर आवेदन करना आसान है, बस अपनी राशि तय करें और सब्मिट कर दें.
IPO अलॉटमेंट कैसे काम करता है?
सबसे पहले कंपनी अपने प्रॉस्पेक्टस में शेयर की कुल संख्या और कीमत तय करती है. फिर ब्रोकर आपके ट्रेडिंग अकाउंट से आवेदन लेता है. यदि सभी इच्छुक निवेशकों का कुल पैसा ज़्यादा हो, तो शेयरों को प्रो‑राटा (अनुपातिक) आधार पर बांटा जाता है. कभी-कभी कम मांग होने पर हर applicant को पूरी राशि मिलती है.
अलॉटमेंट की अंतिम तारीख के बाद कंपनी और रजिस्ट्रार एक अलॉटमेंट रिपोर्ट जारी करते हैं. इस रिपोर्ट में आपका नाम, allotted शेयरों की संख्या, और कब‑कब आपके खाते में दिखेंगे, सब लिखा रहता है.
सफल अलॉटमेंट के लिए क्या करें?
1. टाइमिंग सही रखें – आवेदन अवधि शुरू होते ही अपना आवेदन जमा कर दें. देर से करने पर आपका chance कम हो सकता है.
2. बजेट तय करें – जितनी राशि आप निवेश करेंगे, उसे पहले से सेट कर लें. अगर रुक-रुक कर पैसा बदलते रहेंगे तो अलॉटमेंट में दिक्कत होगी.
3. विश्वसनीय ब्रोकर चुनें – बड़े और भरोसेमंद प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेड करें, ताकि तकनीकी गड़बड़ी से बच सकें.
4. रिज़र्वेशन देखें – कुछ IPO में प्री‑ऑलॉटमेंट (अग्रिम बुकिंग) की सुविधा रहती है, इसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. फॉर्म अलर्ट सेट करें – कई ऐप्स और साइट्स पर अलर्ट लगा सकते हैं ताकि नई IPO या अलॉटमेंट अपडेट तुरंत मिलें.
इन आसान टिप्स को अपनाकर आप अपनी शेयर बंटवारा प्रक्रिया में बेहतर chances बना सकते हैं. याद रखें, हर IPO का अपना नियम होता है, इसलिए प्रॉस्पेक्टस पढ़ना न भूलें.
आजकल कई कंपनियों के IPO में बड़ी माँग और कम सप्लाई रहती है, इसलिए अलॉटमेंट प्रतिशत कम हो सकता है. लेकिन अगर आप सही तैयारी कर लें तो भी कुछ शेयर मिल सकते हैं, जो भविष्य में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं.
IPO अलॉटमेंट की खबरें, टाइमलाइन और टिप्स को नियमित रूप से फॉलो करें. इससे आप न केवल निवेश के अवसरों का फायदा उठाएंगे बल्कि मार्केट की समझ भी बढ़ेगी. Happy investing!