बिजनौर: पत्नी के नाम पर प्रेमिका से निकाली स्कॉर्पियो, व्यापारी का बेटा गिरफ्तार

बिजनौर: पत्नी के नाम पर प्रेमिका से निकाली स्कॉर्पियो, व्यापारी का बेटा गिरफ्तार

जून, 27 2026

कल्पना कीजिए कि आप अपनी पत्नी के नाम पर बैंक से लोन लेते हैं, लेकिन गाड़ी खरीदने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए उसे नहीं, बल्कि अपनी प्रेमिका को शोरूम भेजते हैं। यही है वह चौंकाने वाला मामला जो बिजनौर में सामने आया है। स्थानीय सरिया व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक युवक ने अपनी अलग रह रही पत्नी की पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर महंगी एसयूवी खरीदी। अब पुलिस ने इस कथित धोखाधड़ी मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि पत्नी ने न तो शोरूम में पैर रखा और न ही किसी कागजात पर हस्ताक्षर किए। फिर भी, कागज़ों पर उसका नाम दर्ज था। इस पूरे खेल को उजागर करने वाली शिकायत दर्ज कराई गई और बुधवार की रात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया।

सरिया व्यापारी परिवार से जुड़ा मामला

आरोपी फरहान अहमद, सरिया व्यापारी जहीर अहमद का पुत्र है। जहीर अहमद बिजनौर के मोहल्ला बुखारा क्षेत्र के नामचीन लोहा और सरिया व्यापारी हैं। फरहान अपने भाई सलीम के साथ इस व्यवसाय को चलाता है। स्थानीय स्तर पर इस परिवार की प्रतिष्ठा काफी है, इसलिए जब यह मामला सामने आया तो शहर में हड़कंप मच गया।

फरहान की पत्नी रूखसार मूल रूप से भी मोहल्ला बुखारा, बिजनौर की रहने वाली हैं। हालांकि, वैवाहिक विवाद और उत्पीड़न के कारण वे पिछले कुछ समय से दिल्ली स्थित अपने मायके में अलग रह रही थीं। रूखसार ने पहले ही अपने पति फरहान, जेठ सलीम और एक अन्य महिला के खिलाफ शहर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी।

30 जून को हुई थी गाड़ी की डिलीवरी

मामले की समयरेखा (Timeline) काफी स्पष्ट है। रूखसार के अनुसार, फरहान ने उनके बिना जाने-अनजाने उनकी फोटो और आधार कार्ड का उपयोग किया। उन्होंने बैंक से लोन लिया और Mahindra Scorpio-N की खरीदारी की। कागजात पर खरीदार के रूप में रूखसार का नाम दर्ज किया गया।

लेकिन असली ट्विस्ट तब आया जब 30 जून को गाड़ी की डिलीवरी हुई। शोरूम में रूखसार नहीं गईं। वहां पहुंचीं फरहान की प्रेमिका, जिसे अमर उजाला की रिपोर्ट में अलका यादव, मेरठ के सोतीगंज निवासी बताया गया है। इस महिला ने शोरूम में जाकर गाड़ी की डिलीवरी ली और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। एआरटीओ कार्यालय में भी रूखसार के नाम से फर्जी हस्ताक्षर बनवाए गए, जबकि वे स्वयं कभी वहां गई ही नहीं थीं।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

जब रूखसार को इस धोखाधड़ी की सूचना मिली, तो उन्होंने तुरंत शहर कोतवाली, बिजनौर में शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत में आरोप लगाया गया कि फरहान ने योजनाबद्ध तरीके से उनका शोषण किया है। बुधवार की रात, रूखसार ने कोतवाली में हंगामा किया और कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उसी रात आरोपी फरहान अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया। साथ ही, पुलिस ने विवादित स्कॉर्पियो गाड़ी को भी जब्त कर लिया और कोतवाली लाइब्रेरी में रख दिया। अब मामले की गहन जांच शुरू हो चुकी है।

कानूनी पहलू और भविष्य की कार्यवाही

कानूनी पहलू और भविष्य की कार्यवाही

यह मामला सिर्फ एक वैवाहिक विवाद नहीं है, बल्कि इसमें साइबर अपराध और दस्तावेजी धोखाधड़ी के गंभीर मुद्दे शामिल हैं। भारतीय दंड संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत यह मामला दर्ज हो सकता है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और दस्तावेजों के दुरुपयोग शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि बैंक लोन और वाहन पंजीकरण दोनों में ही दस्तावेजों का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए इस मामले में बैंक अधिकारियों और शोरूम मैनेजरों की भी जांच हो सकती है कि वे कैसे बिना खरीदार की मौजूदगी के इतनी बड़ी रकम का लेनदेन पूरा कर पाए।

Frequently Asked Questions

बिजनौर में स्कॉर्पियो के मामले में किसको गिरफ्तार किया गया?

बिजनौर के सरिया व्यापारी जहीर अहमद के पुत्र फरहान अहमद को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी रूखसार के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की।

गाड़ी की डिलीवरी किसने ली थी?

गाड़ी की डिलीवरी 30 जून को फरहान की प्रेमिका, जिसे अलका यादव कहा जाता है, ने मेरठ स्थित शोरूम से ली थी। कागजात पर खरीदार के रूप में फरहान की पत्नी रूखसार का नाम दर्ज था।

क्या पत्नी रूखसार ने इसमें कोई सहयोग किया?

नहीं, रूखसार ने पुलिस को बताया कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया का कोई पता नहीं था। उन्होंने न तो शोरूम में जाना और न ही एआरटीओ कार्यालय में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। सभी हस्ताक्षर फर्जी थे।

इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?

पुलिस ने आरोपी फरहान अहमद को गिरफ्तार किया है और विवादित स्कॉर्पियो-एन गाड़ी को जब्त कर लिया है। मामले की आगे की जांच जारी है और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।